अगर हम पुराने संस्कारों को मिटाकर उनकी जगह नए संस्कार अपनाते हैं, तो क्या हम एक ही दायरे में नहीं घूम रहे? क्या हम वापस संसार की ओर नहीं जा रहे? क्या हम फिर से संसारी नहीं बन रहे?

अगर हम पुराने संस्कारों को मिटाकर उनकी जगह नए संस्कार अपनाते हैं, तो क्या हम एक ही दायरे में नहीं घूम रहे? क्या हम वापस संसार की ओर नहीं जा रहे? क्या हम फिर से संसारी नहीं बन रहे?Author "admin"अगर हम पुराने संस्कारों को मिटाकर उनकी जगह नए संस्कार अपनाते हैं, तो क्या हम एक ही दायरे में नहीं घूम रहे? क्या हम वापस संसार की ओर नहीं जा रहे? क्या हम फिर से संसारी नहीं बन रहे?
Answer
admin Staff answered 2 weeks ago

जब हम कोई दीया जलाते हैं और अंधेरा मिट जाता है, तो हम यह नहीं कहते कि मैंने अंधेरा हटाया; वह तो कभी था ही नहीं, वह बस रोशनी की कमी थी।