चेतना से परे क्या है?

चेतना से परे क्या है?चेतना से परे क्या है?
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admin Staff answered 1 week ago

भले ही हम इसे चेतना, जागरूकता वगैरह कहते रहें, लेकिन ‘परम सत्ता’ (Absolute) उससे कहीं ज़्यादा है।
चेतना (चित्त) तो बस उसका एक गुण भर है।
यहाँ तक कि ‘सत्-चित्-आनंद’ भी इसे पूरी तरह से बयां करने में कम पड़ जाता है।
एकमात्र ऐसी “चीज़” जो इसे सचमुच अच्छी तरह से बयां कर सकती है, वह है—पूर्ण मौन।
यह एक बिना शर्त स्वीकारोक्ति है कि इसे शब्दों में बयां किया ही नहीं जा सकता।
‘चेतना’ शब्द इसे बयां करने के लिए इसलिए सही लगता है, क्योंकि हम सभी चेतन हैं और इसी वजह से हम इसे समझ पाते हैं।
“100 साल पहले तुम चेतना का क्या करते? तुम्हारे पास तो अपना शरीर भी नहीं था—संसार की बाकी चीज़ों के प्रति चेतन होने की बात तो दूर रही?”
— निसर्गदत्त, एक साधक से बात करते हुए।
चेतना के अस्तित्व में आने से भी पहले, ‘परम सत्ता’ मौजूद थी।
दुनिया के सभी महान संत, अंततः उसी एक बिंदु पर आकर विलीन हो जाते हैं।
“जिस ‘ताओ’ (Tao) को शब्दों में बयां किया जा सके, वह शाश्वत ‘ताओ’ नहीं है।”
— लाओ त्से
इसे परिभाषित करने से इसका दायरा सीमित हो जाता है और इसकी सुंदरता नष्ट हो जाती है; केवल मौन ही इसके साथ सच्चा न्याय कर सकता है।
अपनी अंतर्यात्रा तब तक जारी रखो, जब तक तुम पूरी तरह से निशब्द न हो जाओ।