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यह सब कुछ है…

वह सब कुछ वही है
ग्लेशियरों की भव्यता के पीछे
छिपी ज़बरदस्त ताक़त—
*वही।*
पहाड़ों का टूटना,
भूस्खलन की गूँज,
उसके नीचे दबी जिंदगियों का दुख—
*वही।*
अरबों आकाशगंगाओं की
अंधेरे में घूमती
छुपी हुई आग—
*वही।*
हमिंगबर्ड,
गति में एक रत्न-सी प्रार्थना,
जिसके पंख एक सेकंड में दो सौ बार फड़फड़ाते हैं—
*वही।*
आधी रात का चाँद
खिड़की से अंदर झाँकता,
बाथरूम के फ़र्श पर चाँदी बिखेरता—
*वह भी।*
खामोशी के नीचे की खामोशी,
हर साँस के भीतर की साँस,
वह हाथ जो आकार देता है
फूल और तूफ़ान दोनों को—
*वही।*
भगवत्ता—
वह असीम सत्ता
जो हर चीज़ के रूप में प्रकट होती है,
जो हर किसी में चमकती है,
बर्फ़ और राख में,
पंख और तारों की रोशनी में,
हैरानी में,
दुख में,
जो कुछ भी है, उस सब में—
*वही।*
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