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जब आत्मा जागती है।
जब मन सो जाता है और आत्मा जागती है, तो ऐसी अजीब बातें होती हैं जिनकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होती, अनुभव करना तो दूर की बात है।
आत्मा मन की तरह कोई वादा नहीं करती।
आत्मा आपको मन के कहने पर दौड़ाती नहीं है।
आराम तो मिलता है, लेकिन उसे महसूस करने वाला मन नहीं होता।
जो मन सपने देखता था, वह खुद ही एक सपना बन जाता है।
आराम मिलता है, खुशी मिलती है, सच्चाई सामने आती है, लेकिन मन नहीं होता—बस एक सीधी-सादी मौजूदगी होती है।
उस पल में होने वाली हर चीज़ जीवंत हो उठती है; हर हवा का झोंका, सूरज की हर किरण, हर पत्ता, हर फूल, हर इंसान—ये सब ईश्वरीय संदेशवाहक बन जाते हैं।
संतोष मिलता है, और ऐसा लगता है कि अब कुछ भी करना बाकी नहीं रह गया।
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