No Video Available
No Audio Available
મીઠાની બે ઢીંગલીઓની વાર્તા
नमक की दो गुड़ियों ने तय किया कि वे समुद्र की गहराई नापेंगी।
पिछली बार उन्हें समुद्र में कूदते हुए देखा गया था, और वे अभी तक वापस नहीं लौटी हैं।
आइए और गहराई में चलते हैं… 😊
नमक की गुड़ियों की इस प्रतीकात्मक कहानी में, कौन सी चीज़ सबसे ज़रूरी है?
वे दो गुड़िया?
गुड़ियों का नमक?
गहराई जानने की गुड़ियों की कोशिश?
समुद्र में कूदना?
समुद्र की गहराई? या
गुड़ियों का गायब हो जाना?
सवाल का मुश्किल हिस्सा यह था कि कोई एक चीज़ दूसरी चीज़ों से ज़्यादा ज़रूरी नहीं है।
मैंने आपको चुनने के लिए मजबूर किया, लेकिन असल में, कोई भी घटना सिर्फ़ एक चीज़ से नहीं होती; किसी भी घटना के होने के लिए सभी चीज़ें बराबर ज़रूरी होती हैं।
तो –
नमक की दो गुड़िया।
दो गुड़िया क्यों? वे दोहरेपन (duality) को दिखाती हैं। हम सब नमक की गुड़िया ही हैं।
सिर्फ़ नमक ही क्यों, कोई और चीज़ क्यों नहीं? – क्योंकि गुड़ियों का नमक और समुद्र का नमक एक ही है (नमक समुद्र से ही आता है)।
हम दिव्यता (Godliness) में पैदा होते हैं; हम ही दिव्यता हैं। (नमक के बिना, नमक की गुड़ियों का कोई अस्तित्व नहीं है; दिव्यता के बिना, हमारा कोई अस्तित्व नहीं है)।
गहराई जानने की कोशिश हमारे अंदर जाने की कोशिश है – यानी ध्यान (meditation)।
“जानना” ही क्यों? – मन हमेशा जानना चाहता है।
हमारे पास बस मन ही तो है, इसलिए हाँ, हम ईश्वर को “जानना” चाहेंगे। (मन ही ध्यान शुरू करता है)।
ध्यान का मतलब है जानी-पहचानी दुनिया के आराम को छोड़कर अंदर की अनजान दुनिया को खोजने की हिम्मत भरी कोशिश करना।
समुद्र की गहराई चेतना की असीमता है; अनंत (शून्य अवस्था)।
इसीलिए गुड़िया हार मान लेती हैं। (ज्ञान कम पड़ जाता है; मन को अपनी सीमा का पता चल जाता है)।
गुड़िया खुद को घुलने देती हैं।
गुड़ियों का नमक और समुद्र का नमक एक हो जाते हैं। (वे हमेशा से एक ही थे)।
दोहरेपन का अंधेरा मिट जाता है, और शून्यता की अद्वैत (non-dual) दुनिया रोशन हो जाती है।
गुड़िया एक भ्रम थी; समुद्र ही सच है। हम नश्वर हैं और शून्यता (ईश्वरत्व) अमर है।
No Question and Answers Available