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शिव क्या हैं?
शिव का विचार भारतीय आध्यात्मिक दर्शन से उपजा सबसे गहरा विचार है।
यह सिर्फ़ एक विचार है।
कोई शिव नहीं है, लेकिन हम सबमें शिव है।
लेकिन यह विचार ही आपको निडर बनाता है, जीवन की सुख-सुविधाओं से ऊपर उठने और हर चीज़ और हर किसी को पूरी तरह से स्वीकार करने के लिए तैयार करता है।
और इसी तरह हम उस काल्पनिक शिव की तरह निडर बन जाते हैं।
इसी तरह वह ‘पूर्ण’ (TOTAL) बन जाते हैं, और हम सब भी ‘पूर्ण’ ही हैं।
हमें यह समझना होगा।
शिव सिर्फ़ एक प्रतीक हैं।
जो प्रतीकवाद में खो जाता है, वह हमेशा के लिए खो जाता है।
जो उससे आगे निकल जाता है, वही असली विजेता है।
सभी रूप भ्रम हैं; निराकार होना ही एकमात्र सच्चाई है।
और निराकार ही शिव हैं।
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