सम्यक् वाणी

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सम्यक् वाणी

सम्यक् वाणी

जब मन हमारी आंतरिक शांति में दखल देना बंद कर देता है, तो जो बचता है वह है बिना किसी धारणा वाली बुद्धि (ब्रह्मांडीय बुद्धि)।

बौद्ध शिक्षाओं में, सोच-समझकर बोलने का सिद्धांत कहता है कि आपको तभी बोलना चाहिए जब आपके शब्द आपकी चुप्पी से ज़्यादा कीमती हों।

यह विचार ‘सही वाणी’ (Right Speech) का एक मुख्य हिस्सा है, जो ‘अष्टांगिक मार्ग’ (Eightfold Path) के चरणों में से एक है। यह सच, दयालु, उपयोगी और सही समय पर की जाने वाली बातचीत को बढ़ावा देता है।

जानबूझकर चुप रहने को खालीपन नहीं, बल्कि बुद्धिमानी का काम माना जाता है।

इससे आप बातों को गहराई से सुन पाते हैं और गपशप, अहंकार या गैर-ज़रूरी सफाई देने से आपकी आंतरिक शांति को खत्म होने से बचाया जा सकता है।

 

सिर्फ़ अभ्यास से ही आप खामोशी की अहमियत समझ सकते हैं।

Aug 14,2026

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