तुरीय और तुरीयातीत अवस्थाएँ क्या हैं?

तुरीय और तुरीयातीत अवस्थाएँ क्या हैं?तुरीय और तुरीयातीत अवस्थाएँ क्या हैं?
Answer
admin Staff answered 3 months ago

साधना गहरी होती जाती है, विचार विलीन हो जाते हैं, चेतना शेष रह जाती है।
जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं, चेतना (ज्ञान) का सचेत होने का उद्देश्य खो जाता है, क्योंकि सचेत होने के लिए कुछ भी नहीं बचता, सिवाय स्वयं के प्रति सचेत चेतना के।
वह भी एक समय पर विलीन हो जाता है, और परम सत्य का अनुभव होता है, लेकिन पूर्ण मौन में।
सामान्यतः हम कहते हैं –
तमसोमा ज्योतिर्गमय। मुझे अज्ञान के अंधकार से जागरूकता के प्रकाश में ले चलो, और यह सत्य है।
परन्तु आगे की यात्रा हमें इस प्रकाश से भी परे, अंधकार की अथाह गहराई में ले जाती है, और वहीं तुरियातीत (तुरिया से परे) स्थित है।
तभी संपूर्ण संसार, संपूर्ण ब्रह्मांड (या ब्रह्मांड), एक हो जाता है।
जागरूकता एक रेशमी धागा है जो हमें इस रहस्यमय, अज्ञेय अवस्था की यात्रा पर ले जाता है, जहाँ जागरूकता भी अपना महत्व खो देती है।
परन्तु जागरूकता लुप्त नहीं होती; यह एक संभाव्यता के रूप में छिपी रहती है, ठीक वैसे ही जैसे एक वृक्ष बीज में पहले से ही छिपा होता है, भले ही वह प्रत्यक्ष न हो।
“तुरिया” (चौथी अवस्था) अंतर्निहित साक्षी चेतना है जो जागृति, स्वप्न और गहरी नींद में व्याप्त है, जो अद्वैत वास्तविकता का प्रतिनिधित्व करती है। तुरियातीत (“चौथी से परे”) सभी अवस्थाओं के पूर्ण पारगमन को दर्शाता है, जहाँ साक्षी-अवलोकन का भेद भी लुप्त हो जाता है, और अद्वैत में विलीन हो जाता है। आत्म-साक्षात्कार। इन्हें अक्सर एक ही माना जाता है, जिसमें तुरियातीत इस वास्तविकता की परम, स्थापित चेतना है।